लिखने की जगह

कृष्ण कल्पित

  • युद्ध और नष्ट होती दुनिया

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    || युद्ध || जब जब भीतानाशाह का तख़्ता हिलता हैतब तब हीसीमा पर ख़तरा बढ़ता है युद्धदो डरे हुये तानाशाहों काआख़िरी हथियार होता हैजिसे वह देशप्रेम के नाम परजनता के कमज़ोर कंधों पर ढोता है युद्ध का ख़तराअचानक नहीं मंडराता हैपहले तानाशाहबहुत सारे परमवीरचक्र बनवाता है पुताई करवाता है उस महल कीजहाँ समझौता होना है!…

  • विजय एक दाहसंस्कार का नाम है

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    (१)अधर्म का नाश हो गयालेकिन कुछ अधर्मी बचे रह गये हैं कुछ विधर्मी बचे रह गये हैंइस धर्म-परायण देश में पराजित कहाँ जाएँविजेताओं के देश मेंकहाँ जाएँ जो सताये हुये हैं सदियों से भूलना मतजो पराजित हैंउनके दम पर ही है तुम्हारा विजय-जुलूस इस तुमुल-कोलाहल-कलह मेंभूलना मत लाओ त्ज़े की बात :विजय भी एक दाह-संस्कार…

  • खंडहर पर घास

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    यह ऐसा अभागा समय थाजब ठगों और लेखकों मेंकवियों और जेबकतरों मेंनाटककारों और भंडेतों मेंचित्रकारों और पुताईगरों मेंप्रोफ़ेसरों और मवालियों मेंकुलपतियों और कमीनों मेंपुजारियों और कसाइयों मेंसम्पादकों और दलालों में कोई फ़र्क़ नहीं रह गया था एक भूतपूर्व नौकरशाह की इच्छा थीकि उसे एक कवि के बतौर याद रखा जायेएक हत्यारे की आकांक्षा थीकि उसकी…

  • फूल चुनती लड़कियां

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    हाथों में चपलताचमक आँखों मेंभोर के अन्धेरे मेंफूल चुनती हैं लड़कियाँ ठीक इसी तरह कौंधती है तड़ितकाले मेघों के बीचठीक इसी तरह चटकता है फूलमोगरे काभोर में यही वह समय हैजब लड़कियाँ नहीं करती इनकारसिर्फ़ हँस देती हैंहर बारइसके बाद ही धरती परफैलता है उजियार ठीक इसी समयहोती है भोरठीक इसी समयअदृश्य हो जाती हैं…

  • चार स्त्रियां

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    मैंने चार स्त्रियों का पीछा किया वे जा रही थीं अपने-अपने घरगोधूलि बेला में वे चार दिशाओं से आई थींजैसे हों चार बहनेंपर अब एक दिशा में जा रही थीं चार स्त्रियांएक वीरान शहर को आबाद करती हुईं वे मायके जा रही थीं या ससुरालक्या कहा जा सकता हैखेत से आ रही हैं या बाज़ार…

  • लेकिन वसन्तसेना

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    जाना कहीं और थाइधर चला आया इसी तरह भटकता रहा हूँ उम्र भरकहीं और जाना था और कहीं और पहुँच गया शहर में महामारी थीश्मसानघाट पर हंगामे थेसियासत अब क़त्लगाह थीऔर मजहब एक साज़िश साहित्य के निर्जीव उत्सव थेपुरस्कार वितरण और सम्मान-समारोह थेया उनकी घोषणा काग़ुलाम कवियों-लेखकों को इंतज़ार था वे चतुर-चालाक थेबुद्धिमान और दुनियादार…

  • एक शैतान स्पिनर की याद

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    तुम एक शैतान-स्पिनर थे स्पिनर शैतान ही हो सकताजो चकमा दे सकता हैरान कर सकता हतप्रभ कर सकता टॉप स्पिनलेगब्रेकफ़्लिपरसुर्रागुगलीतुम हर गेंद फेंकने में माहिर थे तुम माहिर थेस्त्री, स्पिन और सेक्स केतुम्हारी फ़िरकी मशहूर थीबेदी, प्रसन्ना और चन्द्रशेखर की तरहऔर अदा क़ातिल थी तुम्हें नहीं होना थासिद्धू, सचिन और अज़हर के सामनेउनको नहीं होना…

  • एक सौ तिरसठ क़ब्रें

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    जो बसंत के दिनऔर मासूम बच्चों की क़ब्रें गिनकर कविता लिखते हैंवे कवि नहीं क़ातिल हैं वे दरवेश के भेस में दरिंदे हैं नापजोख कर बनती हैं क़ब्रेंनापजोख कर लिखी जाती है कविताजितनी क़ब्रें उतनी कविताएंएक भी कम नहीं एक भी ज़्यादा नहीं वे 163 क़ब्रों पर 163 कविताएं लिखेंगेएक पूरा कविता-संग्रहजिससे वे कवि कहलाएंगेऔर…

  • सरहप्पा के फूल

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    पढ़ते-पढ़ते रख दियाहोकर के बे-ध्यानभर्तृहरि के शतक परग़ालिब का दीवान ॥ १ ॥ मीर रखे ऋग्वेद परकालिदास पर भासअमरसिंघ के कोश परकाली जंगली घास ॥ २ ॥ नयन निराला देखतेमुक्तिबोध की ओरमुक्तिबोध बीड़ी पिएंधुआँ-धार-घनघोर ॥ ३ ॥ तभी अचानक खिल उठेसरहप्पा के फूलमेरी क्या औक़ात थीमैं था उड़ती धूल ॥ ४ ॥ •••••••••• krishnakalpit@gmail.com

  • एक कवि की आत्मकथा

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    मैं कुएं में कूदने ही वाला था कि वसन्तसेना ने मुझे थाम लिया सुबह के पाँच बज रहे थे जब मैं रेलवे-स्टेशन से अपना मैट्रिक का रिजल्ट देख कर लौट रहा था जिसमें मैं फ़ेल हो गया था ७१ की लड़ाई ख़त्म हो चुकी थीपूर्वी पाकिस्तान अब बांग्लादेश थामुक्ति-वाहिनी अब मुक्त थीइंदिरा गांधी अब दुर्गा…

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कृष्ण कल्पित

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