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पहल और ज्ञानरंजन : शोकगीतों पर एक शोकगीत
[ जब 2009 में पहल के 90 अंक निकालने के बाद ज्ञानरंजन ने इसे बंद करने की घोषणा की थी तो हिन्दी-संसार हतप्रभ रह गया था। उस समय पहल के अवसान पर बहुत लिखा गया था, यह टिप्पणी उसी समय आलोचक राजाराम भादू के आग्रह पर मैंने मीमांसा में लिखी थी, जिसे लमही इत्यादि कई…
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पेरिस पट्टनम् – तेरह कविताएं
. 1 जैसे बावले गाँव मेंआता है ऊँट वैसे ही आया हैएक हिन्दी कवि पेरिस में! 2 पेरिस में घास भी नागरिक हैपेड़-पौधे भीपत्थर भी नागरिक हैं पेरिस में जीवितों की तो बात ही क्यामृतक भी नागरिक हैं पेरिस में! 3 ईसाइयों के लिएजो वेटिकन सिटी है मुसलमानों के लिए काबायहूदियों के लिए येरुशलम सिखों…

